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Wednesday, 6 March 2013

होली के पद—2


आज बिरज में होली रे रसिया, होली रे रसिया वरजोरी रे रसिया।
घर घर से सब ब्रज बनिता आयीं, कोइ सांवल कोई गोरी रे रसिया॥
आज ब्रज में होली रे रसिया........
इतते आवें कुँवर कन्हाई लाला, देखो उतते आईं राधा गोरी रे रसिया॥
आज ब्रज में होली रे रसिया........
कोई लावै चोवा कोई लावै चन्दन, कोई मलै मुख रोली रे रसिया॥
उड़त गुलाल लाल भये बदरा, मारत भर भर झोरी रे रसिया॥
आज बिरज में होली रे रसिया........
चन्द्रसखी भज बाल कृष्ण छवि, चिरजीवों यह जोड़ी रे रसिया॥
आज ब्रज में होली रे रसिया........

Tuesday, 5 March 2013

होली के पद- 1



गोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग। मोहन मुरली बजावैं गावें गोरी राग ॥1॥

नर नारी एकत्र व्है आये नंद दरबार। साजे झालर किन्नरी आवज डफ कठतार ॥2॥

चोवा चन्दन अरगजा और कस्तूरी मिलाय। बाल गोविन्द को छिरकत सोभा बरनी न जाय॥3॥

बूका बंदन कुमकुमा ग्वालन लिये अनेक। युवती यूथ पर डारही अपने-अपने टेक ॥4॥

सुर कौतुक जो थकित भये थकि रहे सूरज चंद। ’कृष्णदास’ प्रभु विहरत गिरिधर आनन्द कंद॥5॥